
MDSU (महाराजा दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय) में 24 नवंबर को बीए सेमेस्टर IV के ‘आधुनिक कथा साहित्य’ का पेपर दोबारा लिया जाएगा, क्योंकि 29 अक्टूबर को हुई परीक्षा में कुछ गड़बड़ियां थीं। पेपर में सिलेबस से बाहर के प्रश्न पूछे गए थे और कुछ सवाल अगले पेपर में आने थे, उन्हें पहले ही पूछ लिया गया था, जिस पर छात्रों ने आपत्ति जताई थी।
एमडीएसयू (महाराजा दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय) में आधुनिक कथा साहित्य की परीक्षा 24 को दोबारा लिए जाने का कारण किसी विशेष समस्या या घटना से संबंधित है, जैसे कि पिछली परीक्षा में गड़बड़ी होना, प्रश्न पत्र के लीक होने की संभावना, या किसी तकनीकी समस्या का उत्पन्न होना। यह परीक्षा के निष्पक्ष और सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया निर्णय है। हालाँकि, दिए गए खोज परिणामों में परीक्षा के दोबारा कराए जाने के विशिष्ट कारण के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। नीचे दिए गए कुछ संभावित कारण दिए गए हैं।
पिछली परीक्षा में गड़बड़ी: हो सकता है कि 24 को दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय पिछली परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता की वजह से लिया गया हो, जिससे परीक्षा रद्द करने की आवश्यकता पड़ी हो।
●प्रश्न पत्र के लीक होने की संभावना: यह भी संभव है कि परीक्षा से संबंधित कोई प्रश्न पत्र लीक होने की संभावना पाई गई हो, जिसके कारण परीक्षा को रद्द करके दोबारा कराने का फैसला लिया गया हो।
●तकनीकी समस्या: परीक्षा के दौरान किसी तकनीकी समस्या, जैसे कि सर्वर का डाउन होना या परीक्षा में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों में खराबी आना, के कारण भी परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने का निर्णय लिया जा सकता है।
●अमान्य परीक्षा: यह भी संभव है कि परीक्षा आयोजित करने के दौरान कुछ ऐसे कारण सामने आए हों, जिससे परीक्षा को अमान्य घोषित करना पड़ा हो।
●परीक्षा के संचालन में अनिश्चितता: परीक्षा का संचालन ठीक से न होने पर, या कोई अनिश्चितता होने पर, विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने का निर्णय लिया जा सकता है।
यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह केवल कुछ संभावित कारण हैं, और वास्तविक कारण अलग हो सकता है। यदि आप एमडीएसयू से संबंधित हैं, तो आपको विश्वविद्यालय से संपर्क करके परीक्षा के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी जाती है।
राजस्थान के महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति महोदय श्री कल्याणसिंहजी की हार्दिक इच्छानुसार एवं उनके मार्गदर्शन में अजमेर के आर्यविद्वानों एवं आर्य समाज से संबंधित संस्थाएं जिनमें परोपकारणी सभा, अजमेर, आर्य समाज अजमेर तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के सम्मिलित प्रयासों से प्रबंध बोर्ड, महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर की 90वीं बैठक दिनांक 29.08.2016 के मद सं. 24 के निर्णय की अनुपालना में, महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में महर्षि दयानन्द शोधपीठ की स्थापना दि. 16.09.2016 को की गई।
समिति:
माननीय कुलपति महोदय के आदेशानुसार महर्षि दयानन्द शोधपीठ की गतिविधियों एवं लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु निम्नानुसार एक समिति गठित की गई —
1. प्रो. प्रवीण माथुर – निदेशक, महर्षि दयानन्द शोधपीठ
2. डॉ. सोमदेव शास्त्री – महर्षि दयानन्द निर्वाण स्मारक न्यास
3. आचार्य सत्यजित् (मुनि सत्यजित्) – परोपकारिणी सभा/वानप्रस्थ साधक आश्रम, रोजड़
4. डॉ. दिनेशचन्द्र शर्मा – नगर आर्यसमाज, अजमेर
5. डॉ. मोक्षराज – आर्यसमाज, अजमेर
6. श्री सुभाष नवाल – परोपकारिणी सभा, अजमेर
7. कुलसचिव – महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर
8. वित्त नियन्त्रक – महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर
महर्षि दयानन्द शोधपीठ के बारे में विस्तृत जानकारी

महर्षि दयानन्द शोधपीठ द्वारा दि. 10.02.2018 को विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी दयानन्द सरस्वती की 194वीं जयंती मनाई। जिसमें कार्यक्रम की विधिवत् शुरुआत हवन एवं भजन के साथ हुई। कार्यक्रम में स्वामी विष्वंग जी, गुरुकुल के आचार्यगण एवं अन्य संन्यासीगण, वानप्रस्थीगण, ब्रह्मचारीगण, ऋषि उद्यान, अजमेर पधारे। स्वामी विष्वंग ने महर्षि दयानन्द के जीवन चरित्र व उनके द्वारा समाज सुधार, नारी जाति का उद्धार, शिक्षा में स्वामी जी का योगदान व भारतीय सभ्यता संस्कृति का सही व वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बारे में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि स्वामी दयानन्द ने समाज में प्रचलित बाह्य आडम्बरों का विरोध किया व समाज को सही दिशा दी। आज भी स्वामी जी के सिद्धांत व विचार प्रासंगिक हैं। सबसे ज्यादा जरूरत समाज को सही दिशा देने की है। सबसे ज्यादा जरूरत समाज में नैतिकता की है, जिसके लिए स्वामी जी ने भरपूर प्रयास किए। आजादी में स्वामी जी के योगदान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी में भी स्वामी जी का अहम् योगदान रहा तथा ‘स्वराज‘ शब्द सबसे पहले उन्होंने ही दिया। स्वामी विष्वंग जी ने महर्षि दयानन्द शोधपीठ के निदेशक प्रो. माथुर से कहा कि शोधपीठ के अन्तर्गत विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को स्वामी जी द्वारा किए गए कार्यों से अवगत करवाया जाए ताकि समाज में नैतिकता बनी रहे और देश के युवा सही दिशा में कार्य कर सकें। इस बारे में उन्होंने एक परीक्षा व पुरस्कार देने का निवेदन भी किया जिसको प्रो. माथुर ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। ऋषि उद्यान से पधारे श्री वासुदेव जी ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर शोधपीठ के निदेशक प्रोफेसर प्रवीण माथुर ने शोधपीठ में होने वाली गतिविधियों की पूर्ण व विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि स्वामी जी का पूर्ण जीवन ही एक शोध का विषय है। उनके व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वे एक ऐसे तपस्वी, त्यागी, समाज सुधारक व दूरद्रष्टा थे जिनके प्रयास से समाज में कुरीतियों का नाश व सत्य का उद्घोष हुआ। उनका दृष्टिकोण वैज्ञानिक था और उनका हर विचार आज वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भी हो चुका है। हवन यज्ञ व मंत्रोचारण पर आज भी कई भारतीय प्राद्यौगिकी संस्थानों में शोध हो चुके व हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के उच्च श्रेणी के शोध महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय की महर्षि दयानन्द शोधपीठ में करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

परीक्षा का विस्तृत विवरण (Exam Details)
बुनियादी जानकारी (Basic Information)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| परीक्षा तारीख | 24 नवंबर 2025 (सोमवार) |
| परीक्षा समय | सुबह 11:00 बजे से |
| कुल अवधि | 3 घंटे |
| कुल अंक | 70 अंक |
| विश्वविद्यालय | महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर |
| विषय | हिंदी साहित्य |
| कोर्स कोड | HINT 5.IV01 |
| पेपर नाम | आधुनिक कथा साहित्य (Modern Narrative Literature) |
प्रश्न पत्र की संरचना (Paper Structure)
MDSU का प्रश्न पत्र दो भागों में विभाजित है:
भाग A (Part A) – 20 अंक:
- कुल 10 अनिवार्य प्रश्न
- प्रत्येक यूनिट से कम से कम 3 प्रश्न
- अधिकतम 50 शब्दों में उत्तर देना होता है
- प्रत्येक प्रश्न के 2 अंक
भाग B (Part B) – 50 अंक:
- कुल 10 प्रश्न पूछे जाते हैं
- आपको 5 प्रश्नों का उत्तर देना है
- प्रत्येक यूनिट से कम से कम 1 प्रश्न चुनना अनिवार्य है
- अधिकतम 400 शब्दों में विस्तृत उत्तर
- प्रत्येक प्रश्न 10 अंक का
सिलेबस अवलोकन (Syllabus Overview)
यूनिट 1: आधुनिक कथा साहित्य का परिचय
इस यूनिट में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:
- हिंदी कहानी और उपन्यास का उद्भव और विकास
- आधुनिक हिंदी कहानी का जन्म 20वीं सदी की शुरुआत में माना जाता है
- सरस्वती पत्रिका ने कहानियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
- कहानी विधा के विभिन्न चरण: प्रेमचंद युग, मनोवैज्ञानिक कहानियां, नई कहानी, समकालीन कहानियां
- कहानी और उपन्यास के तत्व और भेद
- कहानी की विशेषताएं: संक्षिप्त आयतन, तीव्र कथा, एकात्मक प्रभाव, सीमित पात्र
- उपन्यास की विशेषताएं: विस्तृत कथा, बहुआयामी संरचना, विविध पात्र, विस्तृत चरित्र चित्रण
- प्रमुख कहानीकार और उपन्यासकार का परिचय
- प्रेमचंद: उपन्यास सम्राट, यथार्थवाद के अग्रदूत
- जयशंकर प्रसाद: मनोवैज्ञानिक कहानियों के रचनाकार
- अन्य महत्वपूर्ण लेखक: चंद्रधर शर्मा गुलेरी, ज्ञानेंद्रपति
यूनिट 2: महत्वपूर्ण कहानियां और उनका अध्ययन
निम्नलिखित निर्धारित कहानियां अध्ययन के लिए अनिवार्य हैं:
| क्रम | कहानी का नाम | लेखक | मुख्य पात्र |
|---|---|---|---|
| 1 | उसने कहा था | चंद्रधर शर्मा गुलेरी | लहना सिंह, महिला सैनिक |
| 2 | पुरस्कार | जयशंकर प्रसाद | माधुलिका, अरुण |
| 3 | पूस की रात | प्रेमचंद | हलकू (किसान), मुन्नू |
| 4 | नशा | प्रेमचंद | विभिन्न पात्र |
| 5 | मेरा घर कहां है | अन्य महत्वपूर्ण कहानी | – |
महत्वपूर्ण कहानियों का विस्तृत विश्लेषण
1. उसने कहा था – चंद्रधर शर्मा गुलेरी
मुख्य जानकारी:
- यह कहानी हिंदी की पहली आधुनिक कहानी मानी जाती है
- इसमें चरित्रिक विकास और मनोविज्ञान पर विशेष बल दिया गया है
- कथा का समय: बीसवीं सदी का प्रारंभिक काल
नायक – लहना सिंह की विशेषताएं:
- निस्वार्थ प्रेम: लहना सिंह महिला सैनिक के लिए शुद्ध प्रेम रखते हैं
- कर्तव्य निष्ठा: वह अपने कर्तव्य को प्रेम से ऊपर रखते हैं
- सैनिक भावना: वीर और साहसी व्यक्तित्व
- त्याग और समर्पण: अंत में जीवन का बलिदान देते हैं
महत्वपूर्ण प्रश्न:
- लहना सिंह की दो चरित्रिक विशेषताओं का वर्णन करें
- “उसने कहा था” को हिंदी की प्रथम आधुनिक कहानी क्यों माना जाता है?
- कहानी में निहित प्रेम और कर्तव्य का द्वंद्व समझाइए
2. पुरस्कार – जयशंकर प्रसाद
मुख्य जानकारी:
- यह कहानी प्रेम और राष्ट्रीयता के द्वंद्व को दर्शाती है
- मनोवैज्ञानिक गहराई इस कहानी की प्रमुख विशेषता है
मुख्य पात्र:
- माधुलिका: एक संवेदनशील महिला जो प्रेम और राष्ट्र के बीच चुनाव करती है
- अरुण: कहानी के पुरुष पात्र
केंद्रीय संघर्ष:
माधुलिका को व्यक्तिगत प्रेम और राष्ट्रीय कर्तव्य के बीच चुनाव करना पड़ता है। यह कहानी दर्शाती है कि कैसे राष्ट्र के हित के लिए व्यक्तिगत सुख का त्याग किया जा सकता है।
3. पूस की रात – प्रेमचंद
मुख्य जानकारी:
- यह कहानी ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों को दर्शाती है
- यथार्थवादी चित्रण प्रेमचंद की विशेषता है
- किसान वर्ग के जीवन की त्रासदी इस कहानी का मूल विषय है
मुख्य पात्र:
- हलकू: एक गरीब किसान जो अत्यधिक गरीबी में जीवन यापन करता है
- मुन्नू: हलकू का बेटा
कहानी का संदेश:
इस कहानी में प्रेमचंद ने दिखाया है कि भारतीय किसान कैसे गरीबी, भूखमरी और शोषण का शिकार हैं। हलकू जैसे किसान अपने सपनों को भी भूल जाते हैं केवल जीवित रहने के लिए।
महत्वपूर्ण प्रश्न:
- “पूस की रात” में चित्रित भारतीय किसानों की त्रासदी का यथार्थवादी विश्लेषण करें
- हलकू के चरित्र के माध्यम से किसान जीवन की किस समस्या को दर्शाया गया है?
4. नशा – प्रेमचंद
कहानी की विषय-वस्तु:
यह कहानी मानव स्वभाव के नकारात्मक पहलुओं को दर्शाती है। नशे की लत और इसके विनाशकारी प्रभावों को प्रेमचंद ने सूक्ष्मता से चित्रित किया है।
परीक्षा की तैयारी के लिए सुझाव (Exam Preparation Tips)
1. पाठ्यक्रम को समझें (Understand the Curriculum)
- सभी निर्धारित कहानियों को कम से कम 2-3 बार ध्यान से पढ़ें
- प्रत्येक कहानी के केंद्रीय विचार, पात्र और संदेश को समझें
- कहानियों के ऐतिहासिक संदर्भ को जानें
2. महत्वपूर्ण नोट्स बनाएं (Create Study Notes)
- हर कहानी के लिए अलग नोट्स तैयार करें
- मुख्य बिंदु, पात्र विवरण, महत्वपूर्ण अंश लिखें
- शब्दकोश (Glossary) बनाएं कठिन शब्दों के लिए
3. महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास (Practice Important Questions)
निम्नलिखित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं:
- कहानी के नायक/पात्र की चरित्रिक विशेषताएं बताइए
- कहानी का मूल संदेश/थीम क्या है?
- समकालीन समाज में कहानी की प्रासंगिकता समझाइए
- पात्रों के आपस के संबंधों का विश्लेषण करें
- कहानी में निहित सामाजिक समस्याओं की व्याख्या करें
4. समय प्रबंधन (Time Management)
- Part A के लिए: 30-40 मिनट (10 प्रश्न × 2 अंक)
- Part B के लिए: 2 घंटे 15 मिनट (5 प्रश्न × 10 अंक)
- अंतिम समीक्षा: 15-20 मिनट
5. उत्तर लिखने की रणनीति (Answer Writing Strategy)
Part A के लिए:
- सीधे और संक्षिप्त उत्तर दें
- 50 शब्दों से अधिक न लिखें
- केंद्रीय बिंदु को हाइलाइट करें
Part B के लिए:
- परिचय (Introduction) से शुरू करें
- मुख्य बिंदु (Main Points) को विस्तार से समझाएं
- उदाहरण (Examples) से समर्थन करें
- निष्कर्ष (Conclusion) से समाप्त करें
परीक्षा से एक दिन पहले की तैयारी (Last-Minute Preparation)
अंतिम 24 घंटे की रणनीति:
- कठोर अध्ययन से बचें: केवल महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा करें
- नोट्स को दोहराएं: अपने बनाए नोट्स को पढ़ें और याद करें
- नींद लें: परीक्षा से पहली रात को कम से कम 6-7 घंटे की नींद लें
- तनाव कम करें: योग या ध्यान करें
- दिमाग को तरोताजा रखें: हल्के व्यायाम या सैर करें
परीक्षा के दिन (On the Exam Day)
परीक्षा हॉल में प्रवेश से पहले
- समय पर पहुंचें: कम से कम 15-20 मिनट पहले परीक्षा हॉल में पहुंचें
- आवश्यक दस्तावेज ले जाएं (admit card, ID proof)
- पेन, पेंसिल, इरेजर जैसी लेखन सामग्री ले जाएं
- हल्का नाश्ता करें परीक्षा से पहले
परीक्षा हॉल में
- प्रश्न पत्र को ध्यान से पढ़ें: पहले 5 मिनट प्रश्न समझने में लगाएं
- आसान प्रश्नों से शुरू करें: आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए
- निर्देशों का पालन करें: हर निर्देश को ध्यान से पढ़ें
- स्पष्ट लिखावट: आपके उत्तर स्पष्ट और पठनीय हों
- समय का ध्यान रखें: घड़ी देखते रहें
अतिरिक्त संसाधन (Additional Resources)
अध्ययन के लिए आवश्यक पुस्तकें
| पुस्तक | लेखक/संपादक | प्रकाशक |
|---|---|---|
| हिंदी साहित्य का इतिहास | डॉ. नगेंद्र | – |
| हिंदी साहित्य का इतिहास | आचार्य शुक्ल | – |
| हिंदी कहानी का इतिहास | डॉ. मधुरेश | – |
| हिंदी कहानी का इतिहास | डॉ. गोपाल राय | – |
| नई कहानी | नामवर सिंह | – |
ऑनलाइन संसाधन
- MDSU की आधिकारिक वेबसाइट: नोटिफिकेशन और महत्वपूर्ण घोषणाएं
- YouTube चैनल: “MDSU Ajmer Classes” – व्याख्यान वीडियो
- स्टडी मटेरियल: विभिन्न शैक्षिक वेबसाइटों पर उपलब्ध
सामान्य गलतियां (Common Mistakes to Avoid)
- सिलेबस को नज़रअंदाज़ करना: निर्धारित पाठ्यक्रम का पूरी तरह अनुसरण करें
- कहानियों को पूरी तरह न पढ़ना: सभी कहानियों को संपूर्ण रूप से पढ़ें
- छोटे उत्तर लिखना: Part B में विस्तृत उत्तर दें
- असंगठित उत्तर: अपने उत्तरों को संरचित तरीके से लिखें
- समय का दुरुपयोग: समय प्रबंधन पर ध्यान दें
सफलता के लिए अंतिम सुझाव (Final Success Tips)
✓ नियमित अध्ययन करें – रोज 2-3 घंटे पढ़ाई करें
✓ सकारात्मक दृष्टिकोण रखें – आत्मविश्वास बनाए रखें
✓ अपने से बेहतर प्रदर्शन करने वाले को देखें – प्रेरणा लें
✓ स्वास्थ्य का ध्यान रखें – संतुलित आहार और व्यायाम करें
✓ शिक्षकों से मदद लें – संदेह होने पर शिक्षकों से संपर्क करें
निष्कर्ष (Conclusion)
MDSU BA 4th Semester की आधुनिक कथा साहित्य परीक्षा 24 नवंबर 2025 को आयोजित होने वाली है। यह परीक्षा आपके हिंदी साहित्य ज्ञान का मूल्यांकन करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
सही तैयारी, समर्पण और आत्मविश्वास के साथ आप निश्चित रूप से इस परीक्षा में सफल हो सकते हैं। कहानियों को गहराई से समझें, महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें, और अपने समय का सही प्रबंधन करें।
याद रखें: “सफलता परिश्रम और कठोर मेहनत का फल है।”
"नमस्ते! अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई है, तो और भी बेहतरीन जानकारियों के लिए मेरी वेबसाइट पर दूसरे लेख ज़रूर देखें!" मिज़ुलेट











Leave a Reply